Thursday, July 31, 2008

ये मौत कविता नहीं है

परदे के पीछे. यह कभी सोचा नहीं था कि मो. रफी साहब की पुण्यतिथि पर युवा प्रतिभा इश्मित सिंह की मृत्यु के बारे में लिखना होगा। यह इत्तेफाक की बात है कि संगीत के बहुत से जानकार यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि आने वाले वर्षो में इश्मित सिंह मो. रफी की ऊंचाई के आसपास तक पहुंचेगा। इसके पहले भी मृत्यु पर कई बार लिखा है परंतु इतनी विराट प्रतिभा और इतनी कम उम्र में मृत्यु पत्थर के जिगर को भी तोड़ सकती है।
पंजाब का इतिहास गवाह है कि वहां के लोगों ने अनेक प्रतिभाशाली, साहसी लोगों को कम उम्र में खोया है। पंजाब की ये रक्तरंजित जमीन बड़ी कठिनाई से इश्मित सिंह की मृत्यु को सहन कर रही है। उसके माता-पिता किस साहस से सांस ले रहे होंगे इसकी कल्पना करना मुश्किल है। यह हादसा इतना अनापेक्षित है कि असत्य सा लग रहा है और जिस ढंग से मृत्यु हुई वह भी अविश्वसनीय सा लगता है परंतु ऊपर वाले की पटकथा पर प्रश्न नहीं पूछे जा सकते। उसे क्या जल्दबाजी थी इश्मित को बुलाने की। उसके पास तो रफी साहब और मुकेश जी हैं।
विगत वर्ष ऋतु नंदा की किताब के विमोचन पर मैं ऋषि कपूर के साथ मुंबई से दिल्ली जा रहा था और एयरपोर्ट पर इश्मित सिंह ने आकर ऋषि कपूर के पैर छुए और बताया कि वह इसी फ्लाइट से दिल्ली जा रहा है। दो घंटे विलंब से जाने वाली फ्लाइट के कारण इश्मित से बात करने का अवसर मिला। उसकी विनम्रता से उसकी गहराई का अनुमान हो रहा था। उसने ऋषि कपूर को रणबीर की फिल्म ‘सावरिया’ का एक गीत वहीं सुनाया। ऋषि कपूर ने आश्चर्य से पूछा कि संगीत जारी हुए सिर्फ तीन दिन हुए हैं और इतने कम समय में इश्मित को पूरी धुन याद हो गई।
ठीक उसी समय फ्लाइट के और विलंब से जाने की घोषणा हुई। इस घोषणा से इश्मित बहुत दुखी हो गया क्योंकि उसे अपने माता-पिता से मिलने की बेकरारी थी। ऋषि कपूर ने प्रस्ताव दिया कि इंतजार का समय काटने के लिए बियर पी जाए। इश्मित ने उन्हें बताया कि वह शराबनोशी नहीं करता। उसकी सादगी, परविार के प्रति प्रेम और संगीत के प्रति संपूर्ण समर्पण देखकर बहुत आश्चर्य हुआ और खुशी भी हुई।
दरअसल इश्मित की प्रतिभा के बारे में तमाम मौजूदा संगीतकार यह मानकर चलते थे कि एक दिन वह इतिहास रचेगा। उसके परिवार को जाने कौन से अदृश्य हाथ थामे हैं जिन्हें नमन किया जाना चाहिए।
परवीन जाकिर का शेर है-
कोई सवाल जो पूछे तो क्या कहूं उससे,
बिछड़ने वाले सबब तो बता जुदाई का।

इसिनबायेवा का फिर विश्व रिकार्ड

मोनाको. रुस की येलेना इसिनबायेवा ने अपना महिला विश्व पोल वाल्ट रिकार्ड फिर तोड़ दिया। इसिनबायेवा ने मंगलवार को मोनाको ग्रांप्री में अपने तीसरे प्रयास में ५.क्४ मीटर की ऊंचाई पर यह रिकार्ड बना दिया।
इसिनबायेवा ने 11जुलाई को रोम गोल्डन लीग मीट में बनाया 5.03मीटर का अपना पिछला रिकार्ड तोड़ा। रूसी पोल्ट वाल्टर का यह१३वां आउटडोर विश्व रिकार्ड और ३0वां ओवरआल रिकार्ड है।
ओलिंपिक और विश्व चैंपियन इसिनबायेवा गत शुक्रवार को लंदन ग्रांप्री में ही यह रिकार्ड तोड़ने के नजदीक पहुंच गई थीं जब उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में बार पार कर लिया था। लेकिन नीचे आते समय उन्होंने बार को गिरा दिया था। इस बीच पूर्व विश्व रिकार्डधारी जमैका के असाफा पावेल ने सत्न में लगातार तीसरी बार १क्क् मी. फर्राटा दौड जीतकर हैट्रिक बना दी। पावेल पेइ¨चग ओलिंपिक से पहले पिछली तीन बड़ी मीट में लगातार जीतते आ रहे हैं।
राष्ट्रमंडल चैंपियन पावेल ने ९.८ सेकंड में यह दौड़ जीती। यह इस वर्ष का उनका सर्वŸोष्ठ समय है। उनके हमवतन यूसैन बोल्ट और अमेरिका के विश्व चैंपियन टायसन ने क्क्८ में उनसे ज्यादा तेज दौडे हैं। बोल्ट ने ३१ मई को पावेल से विश्व रिकार्ड छीन लिया था। बोल्ट ने तब न्यूयार्क में 9.7 सेकंड का विश्व रिकार्ड बनाया था। बोल्ट और गे ने मंगलवार की इस दौड़ में हिस्सा नहीं लिया। अमेरिका के डाíवस पैटन 9.98 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि पावेल के हमवतन ओर ट्रेनिक पार्टनर नेस्टा कार्टर १क्.क् को तीसरा स्थान मिला।
महिलाओं की १क्क् मी.दौड जमैका की कैरन स्टीवर्ट ने 10.84 सेकंड के साथ दूसरे और अमेरिका की टोरी एडवर्डस ११.क् सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रही। टोरी का यह प्रदर्शन निराशाजनक रहा क्यों कि 2क्क्८ में वह 10.78सेकंड का वर्ष का सबसे तेज समय निकाल चुकी है। ब्रिटेन के माíटन रनी ने अमरीका के ४क्क् मी.के चैंपियन जेरेमी वारिनर और लाशान मेरिट की अनुपस्थिति का फायदा उठाते हुए 44. सेकंड के अपने सर्वेŸोष्ठ समय के साथ यह स्पर्धा जीत ली।
डेनियह किपचिरचिर कोमेन ने पुरुषों की १५क्क् मी.दौड़ में तीन मिनट ३१.४९ सेकंड का वर्ष का सर्वŸोष्ठ समय निकाला। पुर्तगाल की नैदे गोमेस ने महिलाओं की लंबी कूद स्पर्धा ७.१ मीटर की छंलांग के साथ जीती।
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